40,000 करोड़ के घोटाले में ED ने लिया बड़ा कदम, अनिल अंबानी सामने हुए

नई दिल्ली
उद्योगपति और रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन अनिल अंबानी की कानूनी मुश्किलें लगातार गहराती जा रही हैं. गुरुवार, 26 फरवरी 2026 को अनिल अंबानी दिल्ली स्थित प्रवर्तन निदेशालय (ED) के मुख्यालय पहुंचे, जहाँ उन्होंने रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (RCOM) और उससे जुड़ी कंपनियों द्वारा किए गए कथित बैंक ऋण धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अपना बयान दर्ज कराया.
अंबानी सुबह करीब 11 बजे केंद्रीय जांच एजेंसी के दफ्तर पहुंचे. सूत्रों के अनुसार, प्रवर्तन निदेशालय की स्पेशल टास्क फोर्स (मुख्यालय) ने उनसे कई घंटों तक पूछताछ की. यह पूछताछ प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के प्रावधानों के तहत की गई है.
₹3,716 करोड़ का निजी आवास 'अबोड' कुर्क
अनिल अंबानी की यह पेशी उस बड़ी कार्रवाई के ठीक बाद हुई है, जिसमें ED ने मुंबई के पॉश इलाके पाली हिल स्थित उनके आलीशान निजी आवास 'अबोड' (Abode) को अस्थायी रूप से कुर्क (Attach) कर लिया है. इस संपत्ति की अनुमानित कीमत लगभग 3,716.83 करोड़ रुपये है. इससे पहले भी इस संपत्ति के एक हिस्से को कुर्क किया गया था, लेकिन अब पूरी इमारत जांच एजेंसी के घेरे में है.
इस ताज़ा कार्रवाई के साथ ही, रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप की अब तक कुर्क की गई कुल संपत्तियों का मूल्य 15,700 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है. पिछले साल भी एजेंसी ने नवी मुंबई स्थित 'धीरूभाई अंबानी नॉलेज सिटी' (DAKC) की 132 एकड़ जमीन कुर्क की थी, जिसकी कीमत 4,462 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई थी.
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा मामला सीबीआई (CBI) द्वारा दर्ज की गई उस एफआईआर (FIR) पर आधारित है, जिसमें रिलायंस कम्युनिकेशंस, अनिल अंबानी और अन्य पर आपराधिक साजिश (120-B), अमानत में खयानत (406) और धोखाधड़ी (420) के आरोप लगाए गए हैं.
ED की जांच के अनुसार, RCOM और उसकी सहयोगी कंपनियों ने घरेलू और विदेशी बैंकों से भारी-भरकम कर्ज लिया था. वर्तमान में समूह पर बैंकों का कुल बकाया 40,185 करोड़ रुपये है. जांच एजेंसी का आरोप है कि इस पैसे का इस्तेमाल उसी काम के लिए नहीं किया गया जिसके लिए कर्ज लिया गया था. इसके बजाय, फंड को अन्य समूह कंपनियों के कर्ज चुकाने (एवरग्रीनिंग), संबंधित पक्षों को ट्रांसफर करने या म्यूचुअल फंड में निवेश करने के लिए डाइवर्ट किया गया.
SBI ने घोषित किया 'फ्रॉड'
संसद में भी इस मुद्दे की गूंज सुनाई दी है. वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने पुष्टि की थी कि भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने आरबीआई के दिशानिर्देशों के अनुसार रिलायंस कम्युनिकेशंस और इसके प्रमोटर अनिल अंबानी के खातों को 'फ्रॉड' (धोखाधड़ी) के रूप में वर्गीकृत किया है. केवल SBI ही नहीं, केनरा बैंक ने भी आरोप लगाया है कि RCOM ने उनके साथ 1,050 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी की है. कुल मिलाकर पांच बड़े बैंकों ने समूह के खातों को संदिग्ध माना है.
शेल कंपनियों और विदेशी संपत्तियों की जांच
जांच का दायरा केवल घरेलू बैंकों तक सीमित नहीं है. ED उन "अघोषित विदेशी बैंक खातों" और विदेशी संपत्तियों की भी जांच कर रही है, जिनका लिंक अंबानी परिवार से होने का संदेह है. इसके अलावा, यस बैंक (Yes Bank) के साथ हुए संदिग्ध लेनदेन भी रडार पर हैं, जहाँ रिलायंस म्यूचुअल फंड ने कथित तौर पर 'क्विड प्रो को' (Quid Pro Quo) के तहत यस बैंक के AT-1 बॉन्ड में 2,850 करोड़ रुपये का निवेश किया था.
रिलायंस इंफ्रा में भी बड़ी गड़बड़ी का शक
जांच में यह भी सामने आया है कि रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर ने सेबी (SEBI) के नियमों को ताक पर रखकर एक अघोषित संबंधित पार्टी (C-Company) के माध्यम से करोड़ों रुपये डाइवर्ट किए. एजेंसी का मानना है कि लोन डाइवर्जन का यह आंकड़ा 10,000 करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है.



